जैविक खेती Organic Farming

“वर्तमान समय में जैविक खेती (Organic Farming) का चलन बढ़ गया है! किसान अपने खेतों में रासायनिक पद्धति को छोड़कर, खेती के लिए जैविक पध्दति को अपना रहे है! जैविक खेती से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है! साथ ही कीटनाशकों के उपयोग ना होने से मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव भी नही पड़ता !”

जैविक खेती क्या है?(Meaning of Organic Farming)

वर्तमान समय मे खेती दो पध्दतियों से की जा रही है! पहली रासायनिक खेती (Chemical or Non-Organic Farming) और दूसरी जैविक खेती (Organic Farming) !

  • रासायनिक पध्दति (Chemical Farming) के अंतर्गत मिट्टी की उर्वरता तथा फसलों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए रासायनिक उर्वरको का इस्तेमाल किया जाता हैं! इसके अलावा रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग भी होता है!
  • जैविक खेती (Organic Farming) में मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए जैविक उर्वरको तथा खाद का उपयोग होता हैं! जैविक खेती के अंतर्गत, खेती की पुरानी पध्दति जिसमें उर्वरक के रूप में गाय के गोबर की खाद, पत्तों की खाद आदि का इस्तेमाल किया जाता हैं!

जैविक खेती की आवश्यकता (Necessity of Organic Farming)

आजादी के बाद के बढ़ती हुई जनसंख्या तथा तत्कालीन पड़ने वाले अकालों के कारण भारत में खाद्दान्न की कमी बनी! इस कारण भारत अधिकतर खाद्दान्न अमेरिका सहित अन्य देशों से आयात करने लगा!

1965 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री लालबहादुर शास्त्री जी ने यह समस्या को समझा! इसके निराकरण के लिए देश के कई हिस्सों का वैज्ञानिक तौर पर भौगोलिक परीक्षण करवाया! विशेष सहयोग और प्रोत्साहन प्रदान किये ताकि फसलों की उन्नत किस्म विकसित हो सके! जिससे ग्रामीणों का रुझान खेती की ओर बढ़ा! इससे कुछ ही सालों में भारत स्वयं खाद्दान्न के मामले में निर्भर देश बन गया!

परंतु इसके साथ ही एक नई समस्या ने जन्म लिया! खेती को बढ़ावा देने हेतु रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल अत्यधिक मात्रा में होने लगा! जिससे खेतों की मिट्टी की उर्वरक क्षमता धीरे-धीरे समाप्त होने लगी! इसके साथ ही रासायनिक पध्दति व कीटनाशकों के प्रयोग से मनुष्यों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ने लगा है!

रासायनिक उर्वरक
रासायनिक उर्वरक

इन सभी समस्याओं को रोकने के लिए जैविक खेती (Organic Farming) एकमात्र विकल्प मौजूद है! सरकार भी जैविक खेती के प्रति लोगों को जागरूक और प्रोत्साहित करने के प्रयास कर रही है! ताकि मिट्टी और मनुष्यों के स्वास्थ्य में लाभ प्राप्त हो!

Cycling Process (चक्रण क्रिया)

जैविकता पूर्ण रूप से प्राकृतिक है! यह एक चक्र पर निर्भर होती है जिसमे अलग अलग घटक इसे पूरा करते है! जैसे जंगलो में पेड़ो से पत्ते झड़ कर नीचे गिरते है! ये पशुओं का भोजन बनते है फिर गोबर के रूप में प्रकृति में वापिस मिल जाते है ! इस प्रकार पत्तो और गोबर के मिट्टी में मिलने से ये खाद के रूप में पेड़-पौधों को वापिस मिलते है! इससे यह चक्र पूर्ण हो जाता है! परंतु कृषि के लिए ये वातावरण उपलब्ध नही हो सकता, इसीलिए किसानों को कृत्रिम उपाय अपनाकर इसे पूर्ण करना होता है!

जैविक खेती के लाभ (Benifits)

  • जैविक खेती से सर्वप्रथम मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है! मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है!
  • पशुओं के गोबर, मल-मूत्र का उचित उपयोग हो जाता है!
  • जैविक कचरे का भी उपयोग हो जाता है, जिससे प्रदूषण भी नही होता!
  • पशुओं के चारे में सुधार होता है, जिससे उनके दूध में भी गुणवत्ता बढ़ती है!
  • फसलों पर कीटनाशकों के छिड़काव ना होने पर मनुष्यों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव नही पड़ता!
  • यह रासायनिक खेती की अपेक्षाकृत सस्ती पध्दति है! इसमे खर्चा कम आता है!
  • फसलों और पशुओं को एक दुसरे पर निर्भर होना पड़ता है! जिससे “जैव-विविधता” पूर्ण होती है!
  • भू-जल में गुणवत्ता आती है!
  • यह जहर मुक्त खेती है !
जैविक उर्वरक
जैविक उर्वरक

नुकसान (Disadvantages)

जहाँ जैविक खेत के कुछ लाभ है वहीं इसके कुछ नुकसान भी है !

  • जैविक खाद्य महंगा होता है! इस कारण किसानो को उनकी लागत का सही मूल्य नहीं मिल पाता !
  • जैविक खाद की आपूर्ति पूर्ण रूप से नही हो पा रही हैं !
  • पूर्ण रूप से जैविक खेत बनाने के लिए लंबा समय चाहिये जो कि किसानों के लिए मुश्किल है!
  • जैविकता बनाये रखने के लिए पशुओ की उपलब्धता भी जरूरी है !
  • जैविक खेती के लिए वैज्ञानिक तौर तरीके जरूरी होते है, इनकी उपलब्धता से ही मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाया जा सकता है!

मैं प्रमीत शर्मा हूं। मुझे आपकी सभी पसंदीदा हस्तियों के बारे में लेख लिखना अच्छा लगता है! कृपया मुझसे संपर्क करें यदि आप कुछ सुझाव देना चाहते हैं या सिर्फ नमस्ते कहना चाहते हैं!

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