रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है ? रक्षाबंधन का ऐतिहासिक महत्त्व ?

भाई – बहन के अटूट प्रेम को दर्शाने वाला यह रक्षाबंधन का पर्व सम्पूर्ण भारत में मनाया जाता है ! यह त्यौहार प्रतिवर्ष श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि को मनाते है ! यह पर्व, हर भाई – बहन के पवित्र रिश्ते और आपसी स्नेह को दर्शाता है ! इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र (राखी) बांधती है ! भाई भी अपनी बहन को उसकी रक्षा का वचन देता है! रक्षाबंधन का अर्थ ही है “रक्षा के लिए बांधा गया बंधन” ! भाई – बहन का यह पर्व पूर्व काल से ही चला आ रहा है ! आइये जानते है रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है और इतिहास में इसका क्या महत्व है ?

2022 में रक्षाबंधन कब हैं शुभ मुहूर्त क्या हैं

रक्षा बंधन का त्यौहार कब है12 अगस्त 2022
दिनरविवार
राखी बांधने का शुभ मुहुर्तसुबह 6:15 बजे से रात 7:40 बजे तक
कुल अवधि13 घंटे 25 मिनट
रक्षा बंधन अपरान्ह मुहुर्तदोपहर 1:42 से 4:18 तक
रक्षा बंधन प्रदोष मुहुर्तशाम 8:08 से 10:18 रात्रि तक

रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है ?

रक्षाबंधन का इतिहास हमें महाभारत काल से ही मिल जाता है ! भगवान् श्रीकृष्ण ने जब शिशुपाल का अपने सुदर्शन से वध किया, तब उनकी उंगली में भी चोट आ गयी, जिससे रक्त बहने लगा ! रक्त को बहता हुआ देख सारी सभा घबरा गयी और रोकने के उपाय करने लगी ! परन्तु वहीँ खड़ी द्रोपदी ने साड़ी का पल्लू फाड़कर श्रीकृष्ण की उंगली में बांध दिया , जिससे रक्त बहना तुरंत रुक गया !

तब श्रीकृष्ण ने द्रोपदी को यह वचन दिया कि “मै हमेशा तुम्हारी रक्षा करूँगा” ! हुआ भी वही, जब भरी सभा में द्रोपदी का चीरहरण हो रहा था और पांडव भी बेबस कुछ ना कर पाए तब श्रीकृष्ण ने ही द्रोपदी के सम्मान की रक्षा की ! इसीलिए हम कह सकते है रक्षाबंधन का यह पर्व द्वापर काल से ही चला आ रहा है !

पौराणिक महत्त्व

भगवान श्रीविष्णु एवं राजा बलि से जुड़ी एक कहानी का और वर्णन मिलता है! राजा बलि ने भगवान विष्णु के वामन अवतार को अपना सबकुछ अर्पित कर दिया और रसातल में चले गए! तब राजा बलि ने अपने आराध्य श्रीविष्णु को अपने साथ रहने की प्रार्थना की ताकि वह प्रतिदिन दर्शन करता रहे !

श्रीविष्णु भी प्रसन्न होकर उनके साथ रसातल में चले गए! परंतु वैकुंठ में लक्ष्मीजी, श्रीविष्णु के ना होने पर दुखी हो गयी और उन्हें वापस लाने के लिए विचार करने लगी! बहुत विचार करने के बाद लक्ष्मी जी ने रसातल में जाकर राजा बलि को राखी बांधी, जिससे राजा बलि भावमय हो गए और उन्होंने भगवान श्रीविष्णु को लक्ष्मीजी के साथ भेज दिया!

वह दिन श्रावण माह की पूर्णिमा थी, तभी से रक्षाबंधन का पर्व हर साल श्रावण माह की पूर्णिमा को मनाया जाने लगा!

इस प्रकार रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के लिए सिर्फ सामाजिक ही नहीं अपितु भावनात्मक जुड़ाव को भी दिखाता है! दूर रहने पर भी भाई-बहन इस दिन मिलकर यह त्यौहार बड़े आनंद से मनाते है!

मैं प्रमीत शर्मा हूं। मुझे आपकी सभी पसंदीदा हस्तियों के बारे में लेख लिखना अच्छा लगता है! कृपया मुझसे संपर्क करें यदि आप कुछ सुझाव देना चाहते हैं या सिर्फ नमस्ते कहना चाहते हैं!

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